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"ईमानदार और बईमान पत्रकार " पत्रकारिता भी लगभग मूलतः व्यवसाय का रुप ले लिया........

2016-10-24
Pranav

"पहेले देश कि जनता और सरकार छोटी सी छोटी खबर को गम्भीरतापूर्वक ध्यान देती थी और अब कि जनता और सरकार गम्भीर मुद्दो को भी आसानी से अनदेखा कर देते है" देश का ईमानदार पत्रकार 1000 प्रतियां प्रकाशित करने के लिये अपना घर गिरवी रख देता है अपना सबकुछ दाँव पे लगा देता है । इनके पास हाकर से अखबार को बट्वाने के लिये पैसा नही होता ये स्वम अपनी सुविधा से अखबार बाँटते है उस अखबार मे छपे समाचार का विपक्ष के लोग बहूत तारीफ करते है अपना उलू सीधा करते है और जैसे ही सत्ता पर आते है तो उस अखबार और पत्रकार को ब्लेक लिस्ट मे रखकर अपमानित करते है और सरकार के विरुध्द समाचार छापने के कारण विज्ञापन नही देते और ऐसे पत्रकार को जब किसी को न्याय दिलाने के लिये सरकारी अमला के पास जाते है या इनसे मिलने के लिये समय माँगा जाता है तो इनके पास समय भी नही रहता और समय दिये भी तो चाय पिलाकर वापस भेज दिया जाता है वो चाहे मंत्री हो या अधिकारी परंतु 100 से अधिक नियम जरूर बता दिया जाता है अंत मे वो पत्रकार निराश होकर लौट जाता है फिर से नई उमीदें लेकर अपना काम करता है और संघर्कष करते हुए कर्ज को बिना पटाये मर जाता है और फिर लोग इनके लिये शोक प्रकट करते है कूछ नेता इनके घर जा पहुँचते है कूछ बड़े नेता समाचार ,टीवी ,शोक सभा रखकर दुख प्रकट करते है और उनको शहर ,प्रदेश और देश के लिये भारी नुकसान कहेकर अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी प्रकट करते है और दूसरी तरफ बईमान पत्रकार 1000 प्रतियां प्रकाशित करके मकान , व्यवसाय ,गाड़ी ,सरकार कि सुविधाएँ का लाभ लेकर शान के साथ जीते है । कूछ साल भर मे ये लोगो को सरकारी जमीन व आधुनिक प्रिंटटिंग मशीनो के मालिक भी बन जाते है ऐसे पत्रकारों से बिना बात किये अधिकारी और मंत्रियों कि सुबह और रात नही होती ।कौन से अधिकारी का कहाँ ट्रान्स्फर करना है इनसे भी पूछा जाता है सरकारी ठेका पाना तोह इनके लिये मामूली बात है सरकारी लीज मिलना इनके लिये मामूली बात है इनको सरकारी लाभ एवम सुविधाएँ तोह इनको पूँछ कर उपलब्ध कराई जाती है क्योंकि इनकी नाराजगी का सामना करने से बईमानों को डर लगता है और इनके लिये विज्ञापन कि सुविधाएँ फोन मे ही उपलब्ध है जब इनके यहाँ कूछ दुख सुख का आयोजन होता है तोह पूरा सरकारी अमला इनके यहाँ अपनी सुविधाएँ देते है मंत्री ,विधायक व सांसद कई बार फोन मे हाल चाल लेते है इनके प्रति अपना कर्तव्य ईमानदारी से निभाते है इनके पास अखबार बटवाने के लिये कार से लेकर हवाई जहाज तक उपलब्ध होता है इनके पास सुविधाओं कि कोई कमी नही होती क्योकी इनके नेता, अधिकारी और व्यापारी इनके बाप होते है और ये उनके पाप को पुण्य मे बदलने का काम ये करते है रावण को राम बनाने कि भूमिका निभाते है । खैर अभी कूछ अच्छे ईमानदार पत्रकार भी मौजूद है ,कूछ मजबूरी मे बईमान बने है और कूछ बईमानि करने के लिये पत्रकार बने है । अगर किसी को बुरा लगा तोह माफी चाहता हूँ कोई इसे व्यक्तिगत न ले आशा करता हूँ ।जय हिन्द

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